ये दौर भी जीतेंगे (Will Win This Time Too)




जीवन की क्षणभंगुरता

फिर सामने है, निर्दयता से,
क्या बड़े, क्या छोटे
बचा नही कोई देश
हर तरफ है हाहाकार

चुनौती भरे वक्त में
लगा है इंसान बेबस होकर
जीवन बचाने को
सब कुछ करने को तैयार।

अब दूरियां जरूरी हो गई
और नजदीकियां नाजायज
हर सांस पर पहरे लगे,और
ठहर सा गया, हर व्यापार।

अठखेलियों के दिनों में
बचपन, मुखोटों के अधीन
चुभते है, उनकी आंखों के प्रश्न
छिन गए, मासूम बच्चों के अधिकार।


ये दौर भी जीतेंगे, बेहतरी से,
प्रयत्न जारी है, बड़ी तैयारी है
उम्मीद रखे, है निशाने पे विषाणु
पार्थ का धनुष करता है टंकार।


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बदलता विश्व, बदलते समीकरण (Changing World, Changing Equations)


उद्वेलित विश्व में फिर शीत युद्ध की आहट
बदलते शक्ति संतुलन, और नई चौधराहट।

मुट्ठी भर लोगों में बट गया संसार
बाकी सब आगे पीछे करते तकरार।

रोज दोस्त बदलते है आजकल
सब कुटिल राजनीति के फल।

महत्वाकांक्षाएं नए आकार में
सिकुड़ती न्याय व्यवस्था प्रतिकार में।

नेतृत्व विश्व में या तो मजबूर है
या फिर सत्य से ही दूर है।

व्यक्ति पालता आशाएं
कानून बदलता परिभाषाएं।

संगठन स्वयं शोषण का जरिया हो गए
झरने शेखी बघारते खुद ही दरिया हो गए।

भूमिकाएं भागती है जिम्मेदारी से
छूटती उम्मीदें अब वफादारी से।

कुछ बारूद बढ़ा कर आंख दिखाते
देशों के समूह द्वेष बढ़ाते।

निरीह मानवता पूरी मौन है
अब आवाज उठाने वाला भी कौन है।

#WorldPoetryDay2021 #UNO

- Ashok Madrecha

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