29 मार्च 2018

टोह (Discovery)


कुछ तो शून्य में गोते लगाने का मन करता है
अब तो ये तन भी बहुत अनशन करता है। 

बोझिल सी पलको के पीछे छुपे हुए संदेश
चुप रहकर , समय भी कितना दफन करता है।

चले बहुत दूर तक बड़े काफिलों के संग
वो ही कहानी फिर, इंसान अकेला भ्रमण करता है।

समझे कुछ लोग, जानकर भी ना समझे
बेमेल समूहों में मनुज, विष वमन करता है।

जान ले जहां कि छोड़ी नहीं उम्मीदें मेंने
आज भी फसादों में इंसान ही अमन करता है।

अशोक मादरेचा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मन का क्या What about Heart

  मन का क्या ये लिखता पटकथा   फिर देह जाने उसकी व्यथा .. ।   ये चंचल , पल पल अधीर सदा गतिमान हर समय स्थिर तो ब...