मन का क्या
ये लिखता पटकथा
फिर देह जाने
उसकी व्यथा..।
ये चंचल, पल पल
अधीर सदा
गतिमान हर समय
स्थिर तो बस यदा कदा ...।
भावों से जब व्याकुल
तो आंसू बह जाते
ये दृढ़ हो जाए तो
पर्वत उड़ जाते...।
ये चलाता सबको
सब समझते हम चलाते
जिंदगी भर साथ है
फिर भी कहां समझ पाते..।
मन के अनेक रूप
जब ये रूहानी हो जाता
समय पटल पर
लिख देता अमर गाथा...।
