28 अक्टू॰ 2015

तेरा अहसास



वो कनखियों से नजर मिलाते है
अपने तुफानों से पर्वत हिलाते है।
बहुत सादगी से रहते है
आँखों से सब कुछ कहते है।
बेशक शरारत और मस्ती का करिश्मा है
अँधेरे में जलती हुई एक शमां है।
रूबरू होके भी अक्श छुपाने का अंदाज
बताओं भला इस खूबसूरती का राज।
लबों से कुछ बोलते तो शायद तराना बन जाता
इन लम्हों के साथ इकरार का बहाना बन जाता।
हवाओं में खुशबु सी समाई है
मुद्दत से वो मेरे शहर में आई है। 
उनके कदमो की आहट करीब आ रही
देखो बहारे मस्ती के गीत गा रही।
लौटा यौवन फूलों का, चांदनी आवारा हो चली
निश्चित है गौरी आज खूब सज धज के चली।
मिलने की आस अधूरी थी अब तक
कितना तड़पाओगे, और कब तक।
वादा करो कि फिर नहीं जाओगे
रूबरू रहके, ताजिंदगी साथ निभाओगे।

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