23 जन॰ 2014

होड़ की दौड़ ( Running and Competition )

होड़ की दौड़  ( Running and Competition ) 
http://us.123rf.com/400wm/400/400/brunosette/brunosette0710/brunosette071000002/1977621-running-green-man-with-a-crowd-in-the-back.jpg
कुछ करने की चाहत
अति आवेश से आहत
भाग रहा मनुज दिशा विहीन सा
संतुलन खो बैठा पर
श्रेष्ट कहलाना जो पसंद हे
व्यथित अंदर से बहुत हे अकेला।
कल के सुख की तलाश में
आज को पूरा भुला दिया
वक़्त को पकड़ने चला पर बेबस सा
साधने लगा निजी हित
और ढूंढने लगा मंजिल वहाँ
बहुत रप्तार से चला किन्तु
क्या साधना ये उलझन
सुलज नहीं पाई
सोचा गहराई में जाकर तो
आँखे ही भर आई
सामने जिंदगी की किताब के
बहुत कम पन्ने बाकी थे
पढने को .. काश
कोई तो समझाता मनुज को
इस होड़ की दौड़ में ……………।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मन का क्या What about Heart

  मन का क्या ये लिखता पटकथा   फिर देह जाने उसकी व्यथा .. ।   ये चंचल , पल पल अधीर सदा गतिमान हर समय स्थिर तो ब...