Jun 4, 2018

अनबोले संदेश (Unspoken Message)


बहाने को अश्क शेष नहीं थे
पथराए से दोनों नयन थे
इंतजार के भाव थे
बेशक दिल में कहीं तो घाव थे।

वो नियति के मारे
शून्य को घूरते थे
आकाश भरा अकेलापन
शायद किसी को ढूंढते थे।

जैसे कई तूफान गुजरे उन पर से
बिखरे केसूओं से झांकते थे
गुजरते राहगीर उस तरफ
कुछ अजीब से आंकते थे।

होठों की कंपकपाहट के बीच
शब्द आकर तो लेते थे
मैं करीब गया, पर समझ नहीं पाया
अजनबी  "अशोक " को वो कुछ तो कहते थे।

Apr 28, 2018

पीछा करता सत्य (Chasing Truth)


जिन्हें समय दिया जिंदगी भर
वो कहते है उन्हें फुरसत नहीं ।

व्यस्त है या बनाते बहाने
जरूर कुछ, गलतियां तो हुई ।

नए मित्रों के संग, नए नए प्रसंग
परिस्थितियां आज, बदल गई ।

जवानी है, ऊर्जा भी चरम पर
दृष्टि शायद कुछ बदल गई ।

अहसास कराने, कुछ भी कर लो
नावों की पतवारें तो फट गई ।

सब कुछ गतिमान अमर्यादित सा
शर्मो हया भी तो मिट गई ।

कुछ अनहोनी का अंदेशा हर किसी को
मानवता की तो नींव हिल गई ।

बेशुमार दौलत की उपलब्धियां
पर सेहत उनकी लील गई ।

सबके सब सपनों के सौदागर
सच्चाई अंदर ही अंदर घुट गई ।

बतियाना तो दूर, वो रुकते भी नहीं
कैसे बताऊं उनकी गाड़ी तो छूट गई ।

----- Ashok Madrecha





Mar 29, 2018

टोह (Discovery)


कुछ तो शून्य में गोते लगाने का मन करता है
अब तो ये तन भी बहुत अनशन करता है। 

बोझिल सी पलको के पीछे छुपे हुए संदेश
चुप रहकर , समय भी कितना दफन करता है।

चले बहुत दूर तक बड़े काफिलों के संग
वो ही कहानी फिर, इंसान अकेला भ्रमण करता है।

समझे कुछ लोग, जानकर भी ना समझे
बेमेल समूहों में मनुज, विष वमन करता है।

जान ले जहां कि छोड़ी नहीं उम्मीदें मेंने
आज भी फसादों में इंसान ही अमन करता है।

अशोक मादरेचा

Mar 19, 2018

Know a Prison around or within us


Many times, a question arises from the bottom of my heart, what kind of life I am living and what I ought to be, this scenario is repeated whenever I am alone. Probably it is a sign of a living soul.

When I look back, I find most of the time I was exposed to the environment wherein my thoughts, my deeds were influenced by survival and security for myself and my family and I would say I was prevented to think beyond. I was forced to make perceptions which suited to the so-called society and when I accepted it I was tagged as a gentleman. Whenever I raised some questions about the validity of any system, I was rewarded with sheer aloofness.

This is probably not my situation, anybody with some original thoughts faces it. A prison within us is created and constantly maintained by compulsions, and such compulsions are recognized by us knowing or unknowingly, willingly or unwillingly. We strive for comforts and make suitable adjustments. The Funniest part of this is that, most of the time we too help expanding this prison, probably to have more companions and eventually society finds better and more respectable prison to accommodate more prisoners. What a great thing happening around us! Wow!

These recognized prisons play very important role in influencing our judgment power. It's like if a prisoner doesn't behave as per prison's rules then he will be punished. Effectively all this process leads to create an environment full of fear.

All new inventions, thoughts, challenges these established prisons and their validity. To avail protection, they are always ready to bring in more influential prisoners to their fold like a political party admitting criminals to run their show behind the curtains.

How to overcome:

Though multiple prisons exist around us, we can avoid being caught in their clutches by remaining more vigilant.

Limit your Greed

If somebody is after money, fame or something else and that too by applying shortcuts then he is most vulnerable person and I would say "best prisoner". When thoughts are already guided by something or someone else possibilities of increasing prisoners would rise.

Know well about your fears:

many times, one is rich with resources, but his fear makes his life miserable. Know more about your fears. Study the facts and realities of situations. Most of the time situation does not warrant such fear to exist. If you are fearful, you will surrender and land in a prison.

Sustained efforts:

Whatever be the situation, sustained and focused efforts bring results. Destiny is our deeds and even if you think it cannot be changed, I would add, it can be modified.
Seek blissfulness:

Don't seek things instead think of complete blissfulness. Believe me, if you dream big, you achieve big. Never feel guilty about your surroundings. You achieve and reach what you really mean.

Let's be more vigilant about our surroundings and avoid being prisoners of so called prestigious prison waiting around us.

Feb 11, 2018

दोस्त को पुकार (calling the friend)




सपनों का पीछा करता मनुज
गंतव्य को भूल बैठा

जब मंजिलें ना मिली
तो जहां रुका उसे ही मंजिल मान बैठा

जब कुछ खास हासिल ना हुआ तो
कुछ अखबारों की सुर्खियों में आकर
जीवन को धन्य मान बैठा...।

खैर जो हुआ सो हुआ
पर इसको आदत सी बना ली

अब तो नित्य ही कृत्रिम जिंदगी जी रहा
घूंट जहर के चुपचाप पी रहा

वो बतियाने को दोस्त भी ना साथ रहे
कुछ कहे तो भला किसको कहे....।

इतना आगे आ गए
कितने पीछे छूट गए

नदियों में पानी बहुत बहा
किनारों ने कितना सहा

चले थे कहां , मुकाम कुछ और मिले
भूलकर सब शिकवे और गिले
आ मेरे दोस्त हम फिर मिले
आ मेरे दोस्त हम फिर मिले....।

Jan 23, 2018

मौन (Silence)



मेरे प्रश्नों से ज्यादा उलझे हुए थे उत्तर
सोचता हूं बोलू या चुप्पी साध लू। 

सत्य इतना जटिल भी होता है
पहले नही था अहसास कभी। 


हतप्रभ सी स्थिति में
कुछ भी सूझता नहीं था। 

बरबस सब होता गया
सध सी गई मानो भीड़ में निरवता
और किसी दुर्जन में भी समता। 

समय को मेरे शब्दों की ज़रूरत थी
और मज़बूरी को मौन की। 

किसे अपना लू किसे नहीं
असमंजस हावी था विवेक पर
ये सब ऐसा था जैसे प्रकाश में
होता अंधेरे का अनुभव। 

ठिठकती न्याय व्यवस्था
सिमटते विकल्प और समाधान
किंकर्तव्यविमूढ़ राजनीति आज
हर कोई जवाब की अपेक्षा में। 

मै खड़ा कर्तव्य पथ के दौराहों पर
आहटें थी कुछ पदचापों की
सत्य मौन साधे एकांत में
और असत्य अकड़ रहा था।

----- अशोक मादरेचा

Dec 21, 2017

समझ (Understanding)





मुझे बहुत समझाया गया 

कुछ उल्लेखित राहों पे चलने को
लादे हुए माहौल में पलने को।

प्रश्न करने की मनाही हरदम
बहुत निगरानी में थे मेरे कदम।

आत्मा पर पहरे भला कब तक चलते
विचार तो बच्चों की तरह मचलते।

में भी लोगों को पहचानने लगा
उनके भावों को जानने लगा।

किसीने मुझे भक्त बनाया
किसीने अशक्त बनाया।

जब सत्य से मुलाकात हुई
जीवन मे नई शुरूआत हुई।

अब समय को जानकर
अपनी मर्यादा को मानकर।

मै मौलिकता के मार्ग पे चल पड़ा
प्रतिक्रियाओं से बाहर निकल पड़ा।

अब चंचल मन भी मान जाता है
अनेकांत से निकट का नाता है ।

अंतरिक्ष का अंतर में आभास करता हूं
अनसुलझे प्रश्नों के उत्तरों की तलाश करता हूँ।

--- अशोक मादरेचा  (Ashok Madrecha)

Nov 23, 2017

कविता (Hindi Poem)



मुझे चुनोतियाँ तो हर रोज मिलती है
मेरी कविता, सिर्फ सत्य जो कहती है।

ये कभी श्रंगार तो कभी वीर रस कहती है
निर्भय हो सत्ता के गलियारों से भी गुजरती है।

इस पर हर तूफान भी गुजर जाता
आकाश भी सीमित नही कर पाता।

रोकने की हर कोशिश इसे बृहत्तर कर देती
सूखते शब्दों के झरनों को फिर भर देती।

ये कविताएँ भूगोल नही मानती
स्वछंद ये, खुद के अस्तित्व को नही जानती।

बरबस इनका बनते जाना
शब्दों का चितवन में आना जाना।

ये तो बस शुरू होती है
नही कभी ये अंतिम होती है।

कितनों ने समझा इसे और आनंद लिया
बेशक कुछ बिरलों ने जी भर के इसे जिया।

बस इसे एक प्रेम ही नियंत्रित करता है
अंतर्मुखी बनाकर अभिमंत्रित करता है।

जब प्रेम से अध्यात्म की ओर अग्रसर होती है
कालजयी बन अक्सर वो कविता अमर होती है। 

Oct 22, 2017

Near to Truth सत्य के करीब



A Hindi Poem on a situation of an experienced person guiding his kin about truth of life ...




                                                     मेरी लघुता को मजबूरी मत समझो
                                                   आप जीतते रहो, उसकी व्यवस्था है ये।

                                                  हम तो उस दिन जीतेंगे जब लोग कहेंगे
                                                     आप जीत गए हो अपने प्रयत्नों से।

                                                      रास्तों के कंकरों से दोस्ती है मेरी
                                                      ताकि वो कभी चुभे नही आपको।

                                                      गति तेज है, जरा सम्भलकर चलना
                                                      अभी तो दूर तक जाना है आपको।

                                                      मेरी कलम पर एतराज मत करो
                                                    इतिहास लिखना तो बाकी है अभी।

                                                   शंका के बादलों में छुप के मत रहो
                                                    जो कहना है, दिल खोल कर कहो।

                                              फैसला तो होठों तक आ चुका हाकिम के
                                           मजबूर वो आज तक, गवाहों के इंतजार में है।

                                              हम चलते है जमीन पे आपका ख्याल कर
                                               वरना उड़ना तो हमें भी खूब आता है।

                                               विश्वास की बुनियाद पर घर बनते है
                                             अन्यथा महलों को भी कौन पूछता है।

                                        मेरे आंगन के फूलों में कोई फूल ऐसा महके
                                       लोग बुलाए उस फूल को, विश्व धरोहर कहके।

                                             विचार लो और कर्तत्व को महत्व दो
                                            अविचल बनो ओर सत्य को सत्व दो।

                                      ऊंच नीच के फेर में आज भी यथार्थ का स्थान है
                               झूठ कितना भी पाल लो, सत्य ही महान है, सत्य ही महान है।

Oct 17, 2017

विश्वास या भय ( Faith or Fear )


जीवन में कई बार ऐसी स्थितियाँ आ जाती है कि हम किस तरह जी रहे है और हमे किस तरह जीना था उसमें अंतर नही कर पाते। ज्यादातर लोग तो इस फर्क को समझ ही नही पाते और जो लोग जब तक समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
इसी संदर्भ में आइए, हम जीवन में भय और विश्वास के बारे में कुछ जानने की कोशिश करते है। मेरे एक मित्र है जो नियमित रूप से किसी धार्मिक स्थान पर जाते है एवं उनकी मान्यताओं के अनुरूप पूजा-पाठ इत्यादि करते है
मेरे मन मे भी उनके प्रति बड़ा आदरभाव है। उनका हमेशा ऐसा मानना है कि धार्मिक क्रियाओं से व्यक्ति में अच्छाइयों के संस्कार आते है और काफी हद तक यह ठीक भी था। एक दिन किसी कारणवश वो अपनी इस नियमित क्रिया को कर नही पाये ओर योगवश उसी दिन उनके घर मे कोई बीमार हो गया। अब बीमारी कोई पूछकर तो आती नही पर मेरे मित्र के मन मे यह बात घर कर गई कि धार्मिक क्रिया नही की तो ऐसा हो गया। 
यहीं पर हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। हम श्रद्धा और भय में अंतर नही करते और अपनी कहानी को ओर दुखद बनाने के सारे प्रयास करने लग जाते है। अब बताइये उपरोक्त अवस्था मे श्रद्धा कम थी या भय ज्यादा था। सचमुच सोचनीय विषय है। न तो हम श्रध्दा ओर न ही भय के अस्तित्व को पूरी तरह नकार सकते है। आपने कई बार ऐसा सुना होगा कि ऐसा नही करोगे तो ऐसा हो जाएगा। ऐसा करोगे तो बहुत अच्छा रहेगा। प्रश्न उठता है कि यदि मनुष्य या जीव कर्मो के अनुसार फल पाते है तो समाज में इतना भय कौन फैलाता है। सीधी सी बात है कि ये सब वो ही लोग करते है जिनको इन सबसे सीधा फायदा पहुँचता है। ये फायदा सिर्फ पैसों का ही नही वर्चस्व, नाम, और स्वामित्व के रूप मे भीे पहुंचता है।

हर एक व्यक्ति अपनी शुद्ध आत्मा के साथ इस संसार मे जन्म लेता है और अपने प्रारब्ध के अनुरूप जीवन जीता है। हँसने वाली बात तो यह है कि जब बहुत से लोग किसी बात को सत्य मानने लग जाते है तो उस कथित सामूहिक सत्य को सरल स्वभाव वाले व्यक्ति शंका तो नही करते बल्कि उसे और फैलाने लग पड़ते है और फिर शुरू होता है उनको फंसानेका खेल। विश्वास करना चाहिए पर यह अंधा विश्वास नहीं हो इसका सदैव ख्याल रखना चाहिए।

हम कोई कार्य विश्वास से प्रेरित होकर रह है अथवा सिर्फ किसी ज्ञात या अज्ञात भय वश होकर कर रहे है इसका ज्ञान जरूरी है वरना आपको भटकाने के लिए पूरा जमाना तैयार खड़ा मिलेगा। अपना अनुभव और उससे उपजा विश्वास (trust), श्रद्धा ( faith) इन दोनों के फर्क को भी अच्छे से समझना चाहिए। इसके बाद डर (fear) और मान्यताओं (perceptions) को पहचाने। इसमें भी व्यक्तिगत और सामूहिक मान्यताओं को अलग अलग करके देखे तो आप समझ पाएंगे कि यह उल्लू बनाने का उद्योग कितना फल फूल रहा है। यहां मेरा यह आशय कभी नही है कि आप धर्म के विमुख बने, मेरा तो बस इतना मानना है कि कही सामुहिक मान्यताओं के चलते कहीं हम वास्तविक स्वआत्मा के विरूद्ध तो बर्ताव नही कर रहे, इसका भान सतत रहना चाहिए। हमारी धार्मिक साधना पद्धति भिन्न हो सकती है परंतु मन और ह्रदय दोनों जागृत रहे ऐसी अपेक्षा है।

Oct 15, 2017

Hindi Poem on Journey पथिक



जिंदगी का अर्थ खोजने
मै राहों का पथिक बनकर चल पड़ा
उलझन है अब तक क्यों रहा खड़ा।

उजागर हो रहे नित्य नए अनुभव
कहीं नदियाँ, कहीं झरनों का कलरव।

वक़्त भी इम्तहां ले रहा
नित नई चुनोतियाँ दे रहा।

कई नए चेहरे सामने आते
कुछ उदास, कुछ मुस्काते।

हर मोड़ का मौसम अलग हो जाता
कुछ भाता, कुछ नही सुहाता।

सालता कभी अकेलापन
कभी स्वजनों का अपनापन।

कभी शांत, कभी मुखर
कभी इधर तो कभी उधर।

कुछ भी घटित होता, हर पल अनूठा
मुखोटों की दुनिया मे कुछ सच्चा कुछ झूठा।

हे चुनोतियों ! में चुनोती देता हूँ
इन पंक्तियों के शब्दों से कहता हूं।

प्रेरित हूँ परिंदों की उड़ान से
नही रुकूँगा, मैं थकान से।

मंजिलें दूर सही, यात्रा तो जारी है
रोको मत मुझे, दूर तक चलने की तैयारी है।

Oct 8, 2017

जिंदगी (Life)




कब मेरी तलाश का हिस्सा बन आप साथ हो चले
डर नही अब हमे राहों में कितनी भी हो मुश्किले।

मेरी चुप्पियों का अर्थ भी इस तरह असर कर जाएगा
कोई दूर से आकर भी आँखों मे आंसू भर जाएगा।

एक बूत सी जिंदगी और अनुभव से तराशे हुए पल
बहुत आशा थी मुझे, आप मिलोगे आज नही तो कल।

जैसे नव कौंपलो को ओस की बूंदों का इंतजार था
टकटकी लगाए चौखट पे खड़ा कबसे बेकरार था।

काश आप हरदम करीब रहते, ये मन कहता है
आप से लिपट कर अब खूब रोने का मन करता है।

Sep 10, 2017

Honey Please....




I saw a storm in your eyes
Tears too were on rise

Something went wrong, I presume
Allow me to guess, or assume

Things are going complex
Honey, You need to relax

We had to express since long
We kept on walking along

I feel guilty for not doing something
Tell what is wrong, if anything

May I request you please
How can I make you please

Jul 11, 2017

Accompany Whom You Need To



Life is a continuous management work. Sometimes we have a choice and sometimes not, so we must know what kind of people we should be surrounded. It's very important that to whom we accompany and who are our companions. Generally people of similar wavelength are friends, but sometime situations make people friendly, this may be due to commercial or other compulsions. Those who can differentiate between commercial and natural friendship are smarter than others. An individual and a family as a whole may need different kinds of friends, but one has to strike a balance.

Now, why this talk is going on. Our friends and people who are in regular contacts, affect us tremendously and I would say, constantly. One has to be very vigilant while adding someone in their contacts.

If more positive people are in our touch, we are less exposed to get affected by nervousness and conversely if we are surrounded by people having a negative mind-set, it is bound to affect our mentality too badly.

We must understand it properly that what kind of company we must keep and nurture it too. I have seen many people who don't own even minimum endurance and they are suffering a lot. What I mean to say here is that, a person develops his endurance too learning from people he accompanies. Similarly, we should also learn what kind of people makes us more resourceful. What are the resources, is an individual choice.

Our kind of friends can tell lots of things about us. Companionship is a very respected word, but we rarely review, how deeply it's affecting us. We really need to know, who should accompany us and whom should we.

Jun 20, 2017

बदलते हमदम



( एक गुमराह पति के व्यवहार पर एक पत्नी की मनोदशा का चित्रण, एक कवि के शब्दों में )

इन निगाहों से तुम्हें बदलते देखा है
बारिशों में भी तुम्हें पिघलते देखा है।

माना कि हममें भी कुछ कमियां है
बीच बाजारों में तुम्हें बिकते देखा है।

तुम कहते कि किसी को मारना नही
पर हमने तुम्हें बंदूके खरीदते देखा है।

महफिलों में अक्सर खामोश रहते हो
तन्हाइयों में खूब गाते देखा है।

क्यूं परिंदों को पानी पिलाते हो
कितनों के गुलशन उजाड़ते देखा है।

उलझा दी है जिंदगी दौड़-भाग में
कई दफा तुम्हें नींद में चलते देखा है।

कहते हो कि तुम शराबी नही
दबे पांव महख़ानों में जाते देखा है।

लौट कर कभी तो आओ घर पे
मैंने तो तुम्हें सिर्फ निकलते देखा है।

बर्दाश्त नही यूँ  चुपचाप रोना तुम्हारा
क्या हुआ, तुम्हें तो हरदम हंसते देखा है।

                                                                            --- अशोक मादरेचा

Jun 17, 2017

Stressed ? Read it..



Commenting on others is easy and for many it's entertaining, but analyzing oneself is far difficult and pointing out this fact in a given situation is again more difficult. Unless we understand ourselves, happiness would be a distance dream always. We are governed by our brain and heart and I feel, both are programmed by our past actions and reactions. While on one side we tend to listen logic, on other side we are more comfortable with emotions. This is irony and simultaneously blessings in disguise too, I would say. Now there is a big question, why stress makes inroads in our life ?

Broadly, we can say there are two major stresses :
1. Temporary or Situational
2. Prolonged or self created

Let's talk about Temporary or situational stress. When some situation develops and it disturbs anyone's comfort, it's a stress for him. There are lots of examples like unemployment, ruined relationship, polluted environment, increased expenses, failed in an examination and so on.

What are prolonged or self adopted stresses? In clear and very plain words I would say, when we develop habits of self fighting, it leads to prolonged or self adopted stresses. In such cases, people are living in their own perceptions and among these perceptions they make hyper permutations and combinations. Many times you might have seen people, though listening, but not able to answer as their whole inner world is busy waging a war with themselves. These types of people often apprehend situations which are not real, most of the time. That's why I name it a self-created stress.

So how we brace up to overcome stress? We have to be realistic and pragmatic while dealing with both these stresses. On certain occasions, situation seems logical and sometime it is an outcome of

May 29, 2017

संदेश (Message)


बुने हुए सपनों पे कभी मत इतराना
बीच रास्तों में कभी मत घबराना।

इनको सच होने में वक़्त लगता है
आरम्भ में सब कुछ सख्त लगता है।

धीरज का हाथ थामे आगे बढ़ते रहना
परिश्रम और प्रयास, बस करते रहना।

बहुत थकान आएगी निराश मत होना
कभी हार भी जाओ तो हताश मत होना।

कांटो को देख कभी पीछे मत हट जाना
जहां हो मुश्किलें पहले वहीं डट जाना।

हर चुनौती का साहस से उत्तर देना
आंखों में आंखे डाल प्रत्योत्तर देना।

तपता सूरज, कहीं बादल, कहीं बरसाते
इसमें नया नही कुछ कहीं दिन, कही राते।

अपनी रप्तार और दिशा का ध्यान रखना
जोश में होश ना खोना इसका भान रखना।

याद रहे रणनीति में फेरबदल बहुत कुछ करना
पर ध्यान रहे भरोसा कब कितना किस पर करना।

                                                  मेरा पुनःआग्रह है तुम्हें, नीति और नियत से चलना
                                                   फिर जिंदगी में दूर नही होगा मंजिल से मिलना।।
                                                      
                                                                                           ----- अशोक मादरेचा

May 18, 2017

जीवन की विडम्बनाएं (Irony of life)


अपने लंबे व्यावसायिक जीवन में मुझे कई व्यक्तियों से मिलने अथवा साथ काम करने का अनुभव मिला। जीवन अपने आप में पूर्ण नहीं होता। किसी को कुछ उपलब्ध नही तो किसी को जरूरत से ज्यादा वस्तुएं या सुविधाएं उपलब्ध है। आइये कुछ छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से हम जीवन की सच्चाई को समझे:

1. एक होनहार उद्योगपति अपने बढ़ते व्यापार के बीच भी संतुष्ट नही था। कई बार उससे मिलने का मौका आया पर हर बार उसके चहेरे पर असन्तुष्टि स्पष्ट नजर आती थी। एक बार मुझे उसके साथ एक समारोह में जाने का संयोग बन गया और वहाँ जाकर उसके व्यवहार में आये बदलाव को देखकर मुझे समझ मे आया कि वो इतना असंतुष्ट क्यो था। मैंने देखा कि उस समारोह में उस उद्योगपति से भी कई बड़ी हस्तियां मौजूद थी और वो अपने से बड़े उद्योगपतियों के आगे पीछे घूम रहा था। मेरे मन मे विचार आया कि ये व्यक्ति कितना निर्धन है जो अपने पास सब कुछ होते हुए भी इस तरह से किसी अनजान भूख से सतत व्याकुल है। शायद उसे महत्वपूर्ण बनने की चाह थी या किसी की अनुकंपा पाने की अभिलाषा। सचमुच संसार मे हम अप्राप्त वस्तुओ के प्रति ज्यादा आकर्षित होते है और प्राप्त वस्तुओं के महत्व को समझ ही नही पाते।

2. एक युवा शादी करता है और कुछ ही दिनों के बाद उसका अपनी पत्नी से मोहभंग हो जाता है। कारण जानकर आश्चर्य होगा कि उसकी पत्नी सीधी, संस्कारी और पारिवारिक मूल्यों को समझने वाली थी। उस युवा को आधुनिक, पार्टी इत्यादि में रुचि रखनेवाली पत्नी चाहिए थी। नतीजा- तलाक हो गया। उसने फिर शादी की ओर आधुनिक पत्नी घर लाया। अब ये पत्नी घर का काम बिल्कुल नही करती और बड़ो का तिरस्कार करती । इस कहानी का भी यही सार है कि जो उपलब्ध है उसकी अवहेलना हो रही और जो दूर है उसकी अपेक्षा में वक़्त जाया हो रहा। इंसान रोज सिर्फ सपनों की दुनियां को हकीकत मान रहा। अपने कर्तव्य के बजाय हम अधिकारों की जानकारी ज्यादा रखते है और जीवन को अनायास ही नर्क में ढकेल देते है।

3. एक उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की की शादी अच्छे खानदान में हो गयी। घर मे सब सुविधाएं थी, परन्तु लड़की का मानना था कि बाहर कोई कंपनी में जॉब किया जाय तो अच्छा रहेगा, जैसे पैसा हाथ मे आता रहेगा, घर का काम नही करना पड़ेगा आदि आदि। समय के साथ लड़की का घर से संपर्क कम होता गया,नतीजा ये हुआ कि संतान देरी से हुई, स्वास्थ्य पर स्थायी रूप से असर हो गया। बैंक में थोड़ा पैसा तो बढ़ गया पर घर के बजाय वो अनजाने में अपने जॉब ओर बोस की ग़ुलाम हो गयी। उसके घर पर बड़ा व्यापार था, उसको संभालने की पूरी आजादी भी थी पर होनी को कौन टाल सकता है, व्यक्ति दूर की अप्राप्त वस्तुओं पर आकर्षित होता है और घर के बजाय अन्य में सुख खोजने का प्रयत्न करता रहता है और इसी दौरान जीवन का स्वर्णिम समय बीत जाता है।




उपरोक्त तीन कहानियां सिर्फ संदर्भ के लिए यहाँ लिखी गयी है लेकिन वास्तविक जीवन मे हर व्यक्ति या परिवार में इस तरह की अनगिनत कहानियां रोज आकर लेती है। वास्तविकता ये है कि यदि हम दया, मैत्री, समता जैसे सद्गुणों को जीवन की दौड़ में बहुत पीछे छोड़ आये है। वर्तमान को भूल कर या तो बीते समय का रोना रोते है या भविष्य की चिंता में खोये रहते है।हम अपने आपको बहुत चतुर समझते है और दूसरों को अंधेरे में रख कर जीने को कला की संज्ञा देते है और ये मान लेते है कि इसका प्रतिफल भी हमारे नियंत्रण में है। मानवता के मूल्यों को जो अपनाता है उसके स्वाद का मजा तो वो ही ले सकता है। आज भी नियति अपना काम करती है। चलो कुछ पल ही सही, पर अपने अस्तित्व की सार्थकता के बारे में सोचे, क्या पता उनमे से ही कोई पल हमारी आंखे खोल दे और हम वास्तविक जीवन पथ को पहचान ले।
----- अशोक मादरेचा

Mar 31, 2017

जीवन की दशाएँ ( Direction in Life )




सामान्यतया हम सभी जीवन को तीन दशाओ में व्यतीत करते है और पूरे जीवन में इसके बारे में बहुत कम सोचते है। आइये इन तीनों दशाओं के बारे में कुछ जानने की कोशिश करे।

धन संग्रह दशा :

प्रथम जीवन का प्रमुख भाग रोजगार, धन दौलत कमाने में निकलता है। स्वाभाविक है कि कोई भी धन के द्वारा अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहेगा। धन से संसार की अधिकांश आवश्यकताएं पूरी हो सकती है ऐसा विश्वास भी हर जगह पाया जाता है। धन महत्वपूर्ण है परंतु कितना ? यदि धन हमें शांति के साथ ख़ुशी दे रहा है तो ठीक है परंतु धन के कारण ही घर परिवार की सारी खुशियों पर ग्रहण लग जाये तो कोई भी विवेकशील मनुष्य इस पर विचार करेगा और जरुरत हो वैसे जीवन में परिवर्तन भी लायेगा। धन प्राप्ति के संसाधन और तरीके कैसे हो इस पर चिंतन की जरुरत है।

प्रसिद्धि और मान्यता की दशा :

ज्यो ही धन की उपलब्धि के नजदीक पहुचते है हम सभी जीवन में एकाएक प्रसिद्धि नाम के लड्डू को खाने के लिए बेचैन हो जाते है। पता नहीं क्यों हमें ऐसा लगने लगता है कि जितना लोग हमें मान सम्मान देंगे उतना ही जीवन धन्य होता जायेगा। इस प्रसिद्धि को पाने के लिए हम कई तरह की योजनाएं बनाने लग जाते है और कई बार तो अनचाहे लोगों को भी मित्र बना लेते है। मूल रूप से सोचने वाली बात ये हे की क्या किसी व्यक्ति, समूह, मिडिया, या संग़ठन के मानने से ही आप सम्मानित होते है या आपकी अंतरात्मा के आईने में सत्य के रुबरु होकर अच्छा महसूस करते है। क्यों हम स्वयं को इतना लघु मान लेते है ? प्रसिद्धि की इस झूठी दौड़ में पैसा और मन की शांति, दोनों को दांव पर लगा देना कहाँ की समझदारी है? यह महादशा धार्मिक और अधार्मिक दोनों पर समान रूप से हावी होती है।आजकल तो अखबारों की सुर्खियों में आने के लिए काफी बड़ा विनियोग हो रहा है। दुःख तो तब और बढ़ जाता है जब आपने पैसे भी खर्च कर दिये और मनचाहा परिणाम नहीं मिला। जीवन की इस दशा को में अपने शब्दों में शनि की महादशा भी कह दू तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

दिग्भ्रांति की दशा :

यह दशा उपरोक्त दोनों दशाओं के साथ साथ चलती है और मौका देखकर इंसान को सतत परेशान करती रहती है। इस दशा में कोई भी मूल उद्देश्यों  यानि धन प्राप्ति एवं प्रसिद्धि हेतु इतना भृमित और व्यस्त हो जाता की उसे संबंधों यानि मित्रता, परिवार, समाज आदि के बारे में या तो सोचने का समय ही नहीं मिलता या वो उन सभी को खुद के हिसाब से परिभाषित करने लग जाता है।

एक कथित रूप से धनी और प्रसिद्ध व्यक्ति के दिग्भ्रमित होने के लक्षण इस तरह से पाये जाते है :

1. हंसी में कमी या बनावटी हंसी
2 हर समय महत्वपूर्ण दिखने की बीमारी
3 असहज पहनावा
4 स्वयं को बड़ा ज्ञानी मानना
5 समारोह इत्यादि में चमचो से गिरा होना
6 सही दोस्तों की भारी कमी
7 व्यस्तता दिखाने में महारथ
8 रिश्तदारों एवं मित्रों पर उपेक्षा भाव
9 प्रभुत्व स्थापित करने की प्रबल इच्छा
10 मानसिक तनाव
11 इतना सब कुछ होकर भी शरीफ होने का नाटक।

ये कुछ लक्षण बीमारी के आरम्भ के बताये गए है । गंभीर अवस्थाओं में इन लक्षणों की संख्या बढ़ जाती है। कुछ लक्षण एक आम आदमी तुरंत ताड़ लेता है तो कुछ लक्षणों को समझने के लिए अनुभव की जरुरत होती है।

संसार में सभी अपना कृतत्व करते है और अपने हिसाब से जिंदगी जीने का उपक्रम करते है। प्रश्न पैदा होता है कि क्यों हम जीवन को इतना उलझा देते है? क्यों हम स्वयं अपने आप पर भरोसा नहीं करते ? आज भी सच्चे और अच्छे लोगो की बहुत भारी मांग है पर हम सभी छोटे रास्तो की तलाश करते रहते है । शायद यही वजह है कि हम अंदर से खोखले होते रहते है और फिर औरों की मान्यताओं और सम्मान के लिए किसी भी हद तक गिर जाते है। जीवन और आत्मा के संबंध को हमें हमेशा याद रखना चाहिए ताकि हम अपने विवेक से ससमय समझ सके की कौनसी दशा हम पर हावी हो रही है और क्या परिवर्तन लाना चाहिए।

अशोक मादरेचा

Mar 23, 2017

नियति (Destiny)



पल पल में बहुत कुछ घटित होता
कुछ मन का, कुछ अनचाहे होता
कुछ बदल देता, कुछ बदल जाता
कभी अच्छा, कभी बुरा लग जाता ।

स्वीकृति मन से करो या कहो मज़बूरी
यहाँ हर इच्छा किसकी होती पूरी
मालुम है काम सबके है बड़े जरुरी
पूरी करते जाओ, इच्छाएं रहती अधूरी ।

घूमते नक्षत्र और सितारें भी निरंतर
घूमते परिंदे और इंसान भी इधर उधर
आता नहीं कही पर कुछ भी अंतर
थका जाता मनुज, बहुत कुछ कर कर ।

जान लो कि नियति क्या कहती है
कभी सोचा ? ये जमीं कितना सहती है
रुकना स्वभाव नहीं, नदियाँ तो बहती है
कुछ भी खाली होता, वहाँ हवाएँ तो रहती है ।

काल को कौन परिभाषित कर पाया
कुछ लिखा वो भी लगता है माया
समय से बंधा हुआ यौवन और काया
ना लोग रहे ना उनका कोई साया ।

सब्र करो आज भी आँखों में आंसू आते है
पीड़ा भी होती, वो उम्मीद भी जगाते है
कुछ लोग है जो खूब रंग जमाते है
नियति भी बदल दे ऐसा खेल रचाते है ।

Feb 15, 2017

Mistakes Every One Should Know And Avoid



Life, you can say, is time spent on this earth but the time itself is so precious that one should always know about some common mistakes and avoid these as early as possible to control the unrecoverable damage and repent later. Understanding these mistakes will certainly compel you to think about self-transformation. let us see what are these mistakes.

Not act when sun is shining : When we are younger we must stay vigilant about our health and career both. Parents must think in advance how their children would make them fit and suitable to take on the challenges of life. One can not afford to ignore health and career both.

Run after things which is not worth: 95 % of average people are after so many things or such persons in their life which are not worth to them, at all. They even don't know why the seek them. I have seen such people, if you ask them , they bluntly say what is the need to know, this is the height.

Run when time is out: very very big and common mistake. Anything you start or put your efforts just assure yourself and ask is it right time to do? if confused consult your mentors or experienced people in the field. Having billions of dollars at the age of 85 and at 35 makes a lot of difference. At the age of 85, I feel the money is notional, it may not bring you the joy what you feel at the age of 35. We have to draw a clear line and follow it with utmost clarity.

Always trying to keep others happy: I recommend every one of you to honestly assess yourself if you are not a monk or sannyasi. You will wonder what kind of life we are living. Most probably you would laugh at yourself and that too loudly. I hope you are getting me. Everything you do is for happiness for others most of the time. You work for siblings, society, organization, and so on. In this whole process you simply forget yourself and the true happiness becomes a distinct reality.
  
Never think about priority: Confusion about what to do at what stage creates lots of uncertainty which leads to indecisiveness. We should know about our realistic priorities and not the one which is just a created priority. Imagine a person putting his entire energy after supporting an election campaign while his parents are not well and he is not attending them. On several occasion we feel sad about our investment of time on wrong priorities. A person is deeply engaged in social matters while his children were lacking guidance about their future. These are some instances.

Ignorant and casual approach in abundance: Everything we do, we have to be focused to achieve. Without concluding tasks we can not move ahead. Our approach has to be definite. People don't take seriously to people having casual approach.

Influenced by matters or persons which are totally irrelevant : If we get influenced quite often by different groups, persons, situations and change our goals frequently, success too gets postponed. Life is full of different events, occasions, situations, groups, people, environments and atmospheres. All the time we cannot allow these to pull back. We should be vigilant about our deeds and performance to achieve what we really aspire for.

The mistakes discussed above makes major impact on most of our life and sometimes we don't even notice this. To achieve proper balance in life, we must avoid these.        

 

Jan 26, 2017

Short Quotes on Life 2

Short Quotes About Life 
by Ashok Madrecha



Responsibility, Updated Skills, Timely proper communication and Integrity are the four pillars on which job safety and progress both are assured.
Separate your thoughts from breathing and see the miracles of meditation.
My perceptions, memories, observations, apprehensions and experiences all these builds my belief but thanks almighty, I am still aware about this.
When we do something for own, we connect with world but if we do something for others, we connect with universe.
Nothing is coincidence, everything happens well planned and decided by destiny but destiny is our own Karma (past actions) and by knowing this we can increase our acceptance level resulting to lower stress in our life. Be happy.
Shortcuts are addiction, they lead us to resort unfair practices and thereafter a miserable life. Choice is yours.
Broaden your vision, probably you will forgive all your enemies, opponents and it will give a chance to peace.
Know the power of feelings, understand to control emotions and most important , where not to react at all. All these will certainly make you a good leader and best achiever.
I wonder, how much I resisted doing new things but most of the time it was a great experience and learning too.
for more such quotes visit here

Nov 1, 2016

Think Beyond Numbers



We are growing up with constantly chasing various kinds of numbers. We think and act while keeping numbers always in mind. I don't deny the importance of numbers, but life is far larger than numbers. Knowingly or unknowingly we are so entangled with the numbers that everything we try and express in numbers. We count likes, shares and views on social media. We tend to feel depressed if people don't like our selfies. Sometimes we can't help, a student's performance is measured in numbers, employee's and even company's ranking is decided with targets in numbers and the list goes on. A mere running after numbers and ignoring true happiness will make you imbalanced.

There is an ocean of data and numbers around us and everybody by default follows some set of data either related or unrelated to him. Many of us follow these as if we are not left with any other option or we have such apprehensions in our minds. Prolonged chasing of numbers certainly creates stress and it has to be managed by differentiating what is meaningful, worthwhile and what's not.

Think beyond numbers, there are many things in life where counting is not important. Few of them are:

Feelings
              Emotions
                              Gratitude
                                             Values
                                                        Vision
                                                                   Respect
                                                                                Love

and lots more aspects of real life, all these, we can't afford to ignore. This is an info tech age, and we are bound to remain with numbers, but by being cautious we can weed out excessive numbers and make our life happier, balanced and effective too.

Oct 21, 2016

Journey Towards Innerself



My inner journey is taking me to places which are strange and totally unknown. There are challenges and manifestations. The path is sometimes cozy and difficult at other times.

Massive revelations, new horizons, and stellar black holes are being experienced as I advance and cross billions of galaxies. Everything is amazing and unique. My perceptions and beliefs which were drawn since many births are reshaping and leading to the complete overhaul.

The soul is really eternal and witnessing the body around it. I feel finding new definitions for everything I come across and the true calmness is apparent and sustained for longer periods. Since childhood, I heard many times that the sky is the limit, but now I can envision that sky may be only the beginning, real journey is far bigger, better and divine.

Observing and expressing in words all these simultaneously is a difficult task. The journey took me

Oct 5, 2016

समय की पुकार



अब सारे नियम बदल दो
ओ नेतृत्व, ससमय दखल दो।

तीर प्रत्यंचा पे चढ़ा है इस बार
धनुष कर रहा जोरो की टंकार।

वक़्त का तकाजा है
केंद्र में सामर्थ्यवान राजा है। 

सिद्ध करो पुरुषार्थ को
याद करो पार्थ को। 

करते जो विष वमन
जानले वो ऐ वतन। 

धरा के उपकारों का कर्ज
बहुत बढ़ रहा ये मर्ज। 

कुछ तो बड़ा फैसला हो
आर पार का हौसला हो। 

जयचंदो को रोंदने का समय
देश करता है अनुनय। 

सत्य को सम्बल दो
निर्बल को बल दो। 

फड़कती भुजाएँ वीर जवानों की
याद आती है फिर से बलिदानों की। 

हर चुनोती में विजय का वरण हो
गौरवशाली राष्ट्र निर्माण का
सुन्दर सा वातावरण हो
सुन्दर सा वातावरण हो।

Sep 26, 2016

कटाक्ष


 कटाक्ष

शराफ़त के ज़माने अब कहाँ
यूँ अकेले मत पड़ो यहाँ वहाँ।

समूहों के झुण्ड आस पास है
कोई साधारण, कोई खास है।

हर कोई खींचने की फ़िराक में
मना करो तो आ जाते आँख में।

जंगल छोड़ भेड़िये शहरों में आने लगे
सुन्दर लिबासों में शरीफों को लुभाने लगे।

ख्वाब बेचने का व्यापार चल पड़ा
लालच में हर कोई मचल पड़ा।

समूहों में हर चीज जायज हो जाती
विचारधाराएं ख़ारिज हो जाती।

नये दौर के तर्क नए , सत्य स्वयं भटक गया
इंसान इंसानियत छोड़, समूहों में अटक गया।

ईमान कम बचा , नियति तो बहुत स्पष्ट है
शिकायत किससे करे जब पूरा तन्त्र ही भ्रष्ट है।

...... अशोक मादरेचा 

Sep 18, 2016

Happening Quotient

Recently I was going through the trend of commonly asked questions raised by people in seminars on motivation, I clearly sensed that there is a common tendency of having lack of clarity about how to get things done faster and most of the questions were raised had same essence, though raised in different words and tones by different individuals.
Previous experience says that everything which happens always had its very own "happening quotient". Happening quotient is like feasibility apprehended in advance. In larger term it includes mapping of resources, approach, timing, location and anticipation of probable situations. We come across many people with repeated complaints about many things not happening as per their wishes. In the reply to them, some may talk about destiny and others will talk about blaming something and things goes on. 




Let us understand it more precisely, farmers sow seed and grow crops. It's not as easy as it is mentioned. The combination of timely seed sowing in fertile land with availability of adequate rain or water, sunlight, fertilizer and constant care all resulted in a good crop. What is important here is to understand in simple term that to get success or accomplishing something one has to understand its probability in context with other factors and resources and its availability in a given situation.

Sep 13, 2016

पंख लगे मन को (Heart With Wings)


शब्दो में समेटना मुश्किल है मन को
बेलगाम होकर छीन लेता ये अमन को।
ये खुश तो दुनिया हरी भरी हो जाती है
ये रूठा तो सब योजनाएं धरी रह जाती है।
समय से परे, पल पल में रंग बदलता है
अनिश्चय में तो ये नटखट खूब मचलता है।
हवा की छोड़ो, आवाज से तेज दौड़ता
समझना मुश्किल, ये निशान भी नहीं छोड़ता।

गति पे सवार, कल्पनाओं के साथ रहने का आदी
कौन छीन सकता है भला मन की आजादी।
देश काल को ये कहाँ मानता
मर्यादित होना नहीं जानता।
मन का वेग प्रबल होता है
सतत जागरण, ये कहाँ सोता है।

अपना पराया ऊँच नीच , मन के लिए विचार है
अपरिमित ऊर्जावान , मन तो अनाकार है।
वो भावों में बसता, भावों में जीता है
भरा हुआ कभी, कभी वो रीता है।
कभी संयत, कभी उन्मुक्त सा हो जाता
बिखर जाता ये कभी सयुंक्त सा हो जाता।
त्वरित बदलावों के नेतृत्व को हर वक़्त तत्पर
ये मत पूछना, चलेगा ये कौनसे पथ पर।
अवसादों से ग्रसित होता जब ये सिमट जाता
उत्साह में आनंदित होकर खुशियों से लिपट जाता।
यात्रा का शौक इसे पल में अंतरिक्ष को नाप लेता
हर परिवर्तन को ये पहले से भांप लेता।
गतिशील मन रुकता नहीं, इसे तो समझना पड़ता है
ना समझों तो आजीवन झगड़ना पड़ता है।
मन को जो मना लिया हर राह आसान बन जाती
वर्ना कितनों की तो जान पे बन आती।
समतल मैदानों में कभी कंदराओं में जाकर आता
नदियों में कभी सागरों की लहरों से बातें कर आता।
कभी अर्थपूर्ण ये कभी निरर्थक घूम लेता
बखूबी आसमान के इंद्रधनुषी रंगों को चूम लेता।                      
कहने को ये तन इसका घर होता है
पर ताजिंदगी ये तो बेघर होता है।
कभी ये हल्का, कभी बोझिल हो जाता
कभी हँसाता, कभी खुद ही रो जाता।
कलुषित होता कभी ये निर्मल हो जाता
पहाड़ों से प्रबल कभी ये निर्बल हो जाता।
सक्रिय होता कभी ये निष्क्रिय हो जाता
कभी नीरस तो कभी प्रिय हो जाता।
ऊपर नीचे, कभी बीच में लटक जाता
किसी पे फ़िदा हो गया तो अटक जाता।
दयावान कभी ये निष्ठुर हो जाता
कभी ह्र्दय में तो कभी दूर हो जाता।
मन माने तो रिश्ते गहरे हो जाते
मन रूठे तो अपने भी दूर हो जाते।
अबाधित मन को जिसने जान लिया
वो सिद्ध बने साक्षात् जग ने भी ये मान लिया।

Jul 31, 2016

Short Quotes on life


Evaluate yourself.. how many people you supported, how many appreciate you and to what extent it makes you happy. All these will make you understand better about your life and suddenly a change of 360 degree angle may become reality.
बताइये ... यदि हम हमारे सारे कार्यों , विचारों एवं संपर्कों , सभी में "मेरा क्या" और "मेरा कितना" इसी पर अपना ध्यान केंद्रित करते रहेंगे तो जीवन में सच्ची खुशियां कैसे प्राप्त करेंगे। परमार्थ में जिसने स्वार्थ खोज लिया उन्हें मेरा मेरा करने की जरुरत ही नहीं रहती।
Thinking from others perspective can make lot of difference in any relationship. Forgiveness is noble, it's never a defeat. Following noble thoughts will certainly bring happiness, just trust.
Having clarity about your priorities is a big achievement. Generally we are confused in choosing right priorities at different stages of life. Money, freedom and inner happiness are three basic choices available. Decide what exactly you wish to achieve and be happy in rest of your life.
Wishing someone on birthday or anniversary may seem to be routine but don't leave this, it is nice way to remain connected. Positive vibes are always for sharing and it prevents you from feeling lonely too.
Jealousy has strange feature, it is always born between related or known people. The moment you achieve something better than others, you don't have to create opponents, they sprout spontaneously. Only precaution you can take is, limit your display.
Right postures, proper breathing and a heart full of nice feeling leads your life out of chaos and all these makes you more healthy.
This is Info-tech age, tonnes of information are thrown around us. We have to choose what to see, process, accept, reject or simply ignore out of it.
"What I will get" can't be applied in every action. There are several occasions we come across where we should not think in this term. Many relations are sustaining because there are people who don't keep account of "what I will get"
You may not agree with someone but the way you differ, makes lot of difference.
अपने भम, पाले हुए डर और मान्यताओं पर गौर करो। जिंदगी को कभी दूसरे नजरिये से भी देखना चाहिए। सिर्फ अपने ही दृष्टिकोण से देखने से जीवन में ठहराव आ जाता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक दो शब्द ऐसे है जिनका अंतर जानना जरूरी है। यदि आप धार्मिक हो तो आपके लिए बहुत से नियम इस संसार में पूर्वनिर्धारित है परन्तु यदि आप आध्यात्मिक हो तो आपको नियम की जरूरत शायद ही पड़े। 
 If you feel you missed something in life than just drop that thinking. It's damn sure even if you had achieved that, your worries would have remained for some other thing. It's all very common..take it easy and enjoy what your present offers you.
          ..... Ashok Madrecha 
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प्रयास (Efforts)

जब सब कुछ रुका हुआ हो तुम पहल करना निसंकोच, प्रयास करके खुद को सफल करना। ये मोड़ जिंदगी में तुम्हें स्थापित करेंगे और, संभव है कि तुम देव तु...